Followers

Friday, August 30, 2013

KHOJ LEGA MARUDWEEP.../ खोज लेगा मरुद्वीप...



Yun hi, bas yun hi
tham gayin thi saansein
mook ho gayin thi fizayein
jab us din
padha tha usne mantramugdh
ek nazm, kajal se varnit
us mayavi chakshu-sudha mein
aur doob gaya, vaastav se nirlipt

us din
apni satrangi duniya mein kaid
us vaakruddha pal ki gahanta
samajh na payi thi hatabhagi
us nishchhal prem ki mahanta

aaj bhi
saat rango ke mohpaash mein lipti
kajrare naino mein sapne liye
roshandaan ke sahare
khojti hai ek hriday apne liye

aaj bhi
wo dooba hua hai
us athah swapna-sindhu mein
ek atoot milan ki asha mein
vishwas hai use, khoj lega
apna marudweep, registaan mein





यूँ ही, बस यूँ ही
थम गयीं थी साँसें
मूक हो गयीं थी फ़िज़ायें
जब उस दिन
पढ़ा था उसने मंत्रमुग्ध
एक नज़्म, काजल से वर्णित
उस मायवी चक्षु-सुधा में
और डूब गया, वास्तव से निर्लिप्त 

उस दिन
अपनी सतरंगी दुनिया में क़ैद
उस वाकरुद्ध पल की गहनता
समझ न पाई थी हतभागी
उस निश्छल प्रेम की महानता

आज भी
सात रंगो के मोहपाश में लिपटी
कजरारे नैनो में सपने लिए
रोशनदान के सहारे
खोजती  है एक हृदय अपने लिए

आज भी
वो डूबा हुआ है
उस अथाह स्वप्न-सिंधु में
एक अटूट मिलन की आशा में
विश्वास है उसे,
खोज लेगा 
अपना मरुद्वीप, रेगिस्तान में



pic courtesy- google

44 comments:

  1. I must appreciate your skills in all the three languages. Its fascinating. This piece is yet another lovely portrayal of your imagination!!

    ReplyDelete
  2. a very humble thank you for the appreciation Chirasree.much appreciated.

    ReplyDelete
  3. बेहतरीन मर्मस्पर्शी कविता।



    सादर

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया यशवंत।

      Delete
  4. बेहतरीन लाजवाब कविता :)

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार तुषार जी

      Delete
  5. ख्याल में उभरता चेहरा
    यथार्थ से बहुत अलग होता है।
    फिर दुआ है आपकी कोशिश रंग लाए।

    मन के सुन्दर जज़्बात और
    ज़ेहन के अनमोल ख्यालात से उपजी,
    आपकी इस बेहतरीन रचना के लिए। …. बधाई

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी , किसी भी लेखक या कवि की तरह मेरी भी यही कोशिश रहती है की अपने ख़यालों और भावनाओं को कुछ सुन्दर शब्दों तथा चरित्रों से सजा सकूं। हौसला अफज़ाई का शुक्रिया अभिषेक जी।

      Delete
  6. विश्वास है उसे,
    खोज लेगा
    अपना मरुद्वीप, रेगिस्तान में


    बहुत सुंदर

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया

      Delete
  7. बेहतरीन लाजवाब

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका बहुत बहुत आभार अशोक जी

      Delete
  8. लाजवाब रचना बहुत खूब...

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद पल्लवी जी

      Delete
  9. आज भी
    वो डूबा हुआ है
    उस अथाह स्वप्न-सिंधु में
    एक अटूट मिलन की आशा में
    विश्वास है उसे,
    खोज लेगा
    अपना मरुद्वीप, रेगिस्तान में

    बहुत सुंदर ! हर एक शब्द हृदय पर अपना चिन्ह अंकित करता है और मर्म पर प्रभाव छोडता है ! बहुत खूब !

    ReplyDelete
    Replies
    1. प्रोत्साहन तथा सराहना के लिए बहुत बहुत आभार दीदी।

      Delete
  10. Very nice effort.Aparnaji some time visit my blog,"Unwarat.com"
    Vinnie

    ReplyDelete
    Replies
    1. thank you for the encouraging words Vinnie ji . will surely visit your blog
      regards

      Delete
  11. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति अपर्णा जी , बधाई आपको ।

    ReplyDelete
  12. बहुत बढ़िया प्रभावित करती रचना के लिए आपको बहुत बधाई ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार अन्नपूर्णा जी। आप खुद इतना अच्छा लिखती हैं ,आपकी टिपण्णी मेरे लिए बहुत मायने रखती है।

      Delete
  13. बहुत सुंदर रचना ! कल भी मैंने कमेन्ट किया था जो दिखाई नहीं दे रहा है !

    ReplyDelete
    Replies
    1. दीदी मैंने आपकी टिपण्णी पब्लिश की है। reply देने का समय नहीं मिल पाया। माफ़ी चाहती हूँ।

      Delete
  14. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .. आपकी इस रचना के लिंक की प्रविष्टी सोमवार (02.09.2013) को ब्लॉग प्रसारण पर की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें .

    ReplyDelete
    Replies
    1. सहर्ष आभार नीरज जी

      Delete
  15. मेरा एक अनुरोध है , कृपया हिंदी को ऊपर रखे एवं अंग्रेजी को नीचे ..आखिर कविता तो हिंदी में हैं

    ReplyDelete
    Replies
    1. नीरज जी आप बिलकुल ठीक कह रहे हैं।पर आपको इसका कारण बता दूं … मेरे कुछ मित्र ऐसे हैं जो हिंदी समझते हैं पर पढ़ नहीं सकते ,उनके अनुरोध पे ही मैं रोमन स्क्रिप्ट में भी हिंदी लेख या कविता पोस्ट करती हूँ। कुछ लोग मोबाइल पे ही ब्लॉग पढ़ते हैं ,देवनागरी लिपि या तो access नहीं कर पाते या फिर अस्पष्ट होती है। उनके लिए ही रोमन स्क्रिप्ट ऊपर रखती हूँ ताकि ज़्यादा scroll न करना पड़े और ये भी समझ जाएँ की रोमन लिपि में भी मेरी पोस्ट उपलब्ध है । सबकी सुविधा असुविधा का ख़याल रखना पड़ता है न.…. कुछ अपना स्वार्थ भी है !!

      Delete
  16. Replies
    1. धन्यवाद दर्शन जी। जी ज़रूर देखूँगी आपका ब्लॉग

      Delete
  17. सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  18. मजनू सा विश्वास हो तो निर्मल तरु जरूर निकल आता है रेगितान में भी ...
    सुन्दर रचना ..

    ReplyDelete
  19. बहुत खुबसुरत मनभाती रचना

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपको मेरी रचना अच्छी लगी जानकर बेहद ख़ुशी हुई उपासना जी

      Delete
  20. बहुत बहुत सुंदर !
    शब्दों का सुंदर संयोजन और उन शब्दों को अर्थ देती अभिव्यक्ति
    ख़ुश रहो और ख़ूब लिखो !!

    ReplyDelete
    Replies
    1. प्रोत्साहन देने के लिए आपकी ह्रदय से आभारी हूँ । इसी प्रकार अपना स्नेह एवं आशीर्वाद बनाये रखियेगा….

      Delete
  21. Replies
    1. thanks a lot for the encouragement Ananya...much appreciated

      Delete
  22. Eta bangla te likhun aaro sundor laagbe. Thik ei bishoy ta bangla te darun khulbe. maccher Jhol er saathe Roti chole na.

    ReplyDelete
  23. Sundar Bahut Sundar
    Lazawaab Jazbaat...

    ReplyDelete
  24. chesta korbo. thank u for your valuable input

    ReplyDelete

SOME OF MY FAVOURITE POSTS

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...