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Sunday, June 23, 2013

NaMo ji ye bhedbhaav kyon? नामो जी ये भेदभाव क्यों ?


Jahan tamaam fauji aur vibhinna border force ke log tatha raahat karmi teen- char dinoN mein kewal 2000 logon ko hi suraksha kshetra tak pahuncha paye hain wahan hamare Modi sahab davaa kar rahe hain ki unhone do dinoN mein 15000 Gujratiyon ko raahat dilane mein madad ki hai.....
Ab tak sab theek tha par hairat ki baat ye ki aapne kaise itne saare peedhit mein se Gujratiyon ko pehchana aur usse bhi zyada khatakne waali baat ye ki jo vyakti is desh ka pradhanmantri banne ki ichcha rakhta hai woh sirf gujratiyon ke bare mein kyon soch raha hai !!!





Insaan madad karte waqt bhi apna paraya sochne lage toh aise insaan ki insaaniyat pe sawaal to uthenge hi bhai....par mera salaam un sabhi logon ko jinhone is vipda ki paristhiti mein bhookhe pyason ko muft mein khana khilaya aur peedhit logon ko jeevandaan diya.



Shayad kuch log kahenge ki ye toh unka kaam hai ...naukri hai, duty hai ... par kitne log apna kaam man laga  ke karte hain? is desh ke neta janata ka paisa kha kha ke kuch karte hain kya? deshseva ke naam par loot rahe hain.....khiladiyon ka kaam hai imaandari s khelna, ab ye bhi chori karne lage hain...
mushkil ghari mein nihswarth bhaav se madad karne wala ishwar tulya hota hai ...aur is waqt ye sainik aur rahat karmi hamare liye bhagwan se kuch kam nahin....





जहाँ तमाम फ़ौजी और विभिन्न बॉर्डर फोर्स के लोग तथा राहत कर्मी  तीन -चार दिनों में केवल २००० लोगों को ही सुरक्षा क्षेत्र तक पहुँचा पाए हैं वहाँ हमारे मोदी साहाब दावा कर रहे हैं की उन्होने दो दिनों में  १५००० गुजरातियों को राहत दिलाने में मदद की है...
अब तक सब ठीक था पर हैरत की बात ये है की आपने कैसे इतने सारे पीड़ित में से गुजरातियों को पहचाना और उससे भी ज़्यादा खटकने वाली बात ये कि जो व्यक्ति इस देश का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा रखता है वो सिर्फ़ गुजरातियों के बारे में क्यों सोच रहा है!!!

इंसान मदद करते वक़्त भी अपना पराया सोचने लगे तो ऐसे इंसान की इंसानियत पे सवाल तो उठेंगे ही भाई... पर मेरा सलाम उन सभी लोगों को जिन्होने इस विपदा की परिस्थिति में भूखे प्यासों को मुफ़्त में खाना खिलाया और  पीड़ित लोगों को जीवनदान दिया.





शायद कुछ लोग कहेंगे की ये तो उनका काम है..नौकरी है,ड्यूटी है.... पर कितने लोग अपना काम मन लगा के करते हैं? इस देश के नेता जनता का पैसा खा - खा के कुछ करते हैं क्या?  देशसेवा के नाम पर लूट रहे हैं... खिलाड़ियों का काम है ईमानदारी से खेलना , अब ये भी चोरी करने लगे हैं..
मुश्किल घड़ी में नि:स्वार्थ भाव से मदद करने वाला ईश्वर तुल्य होता है... और इस वक़्त ये सैनिक और राहत कर्मी हमारे लिए  भगवान से कुछ कम नहीं...







                                                   PICTURE COURTESY GOOGLE






13 comments:

  1. really very sad that bjp is playing politics at the time of crises .you have written very right .

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  2. आपकी यह रचना कल मंगलवार (25 -06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  3. Yes Shikha ji,right now India is going through a turbulent phase.. we can just pray and hope that bad times will soon be over and better sense will prevail

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  4. बहुत बहुत शुक्रिया आपका अरुण जी

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  5. बेहतरीन व सुन्दर रचना
    शुभ कामनायें...

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  6. सलाम है उन सब को जो इस विपत्ती के समय फंसे लोगों की मदद में जुटे हैं ।

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  7. धन्यवाद श्रीराम जी

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  8. जी आशा जी. कई स्थानीय लोगों ने तीर्थयात्रियों को मुफ्त में आश्रय तथा खाने-पीने का सामान देकर उनकी मदद की है…

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  9. उत्क्रुस्त , भावपूर्ण एवं सार्थक अभिव्यक्ति .
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें .

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  10. ji avashya... dhanyavad Madan ji

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