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Tuesday, May 07, 2013

TAMANNA / तमन्ना



Aaj dil badi shiddat se charag jala raha hai
milne ki tamanna liye tumhe bula raha hai

Aftaab ne kab sukun diya hai hamein
tapish mein jalakar hasrat mita raha hai

Tareekh to yahi thi ,guzargah bhi yahi
khat bhi ab bejaan sa susta raha hai

Abra ka tukda roshandaan se jhaank raha hai
hamein baton mein uljhakar dil bahla raha hai

BayaN karna namumkin, ye sulook aisa
bachpana unka aaj behad sataa raha hai

Jazbaat bah gaye,betahasha, aabshar ki tarah
abohawa ki khushnumaii dekh dil muskura raha hai

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आज दिल बड़ी शिद्दत से चराग़ जला रहा है
मिलने की तमन्ना लिये तुम्हें बुला रहा है

आफ़्ताब ने कब सुकून दिया है हमें
तपिश में जलाकर हसरत मिटा रहा है

तारीख तो यही थी,गुज़रगाह भी यही
खत भी अब बेजान सा सुस्ता रहा है

अब्र का टुकड़ा रौशनदान से झाँक रहा है
हमें बातों में  उलझाकर दिल बहला रहा है

बयाँ करना नामुमकिन, ये सुलूक ऐसा
बचपना उनका आज बेहद सता रहा है

जज़्बात बह गये,बेतहाशा , आबशार की तरह
आबोहवा की खुशनुमाई देख दिल मुस्कुरा रहा है

11 comments:


  1. तारीख तो यही थी,गुज़रगाह भी यही
    खत भी अब बेजान सा सुस्ता रहा है-------
    वाह बेहतरीन रचना
    प्रेम की गहरी अनुभूति
    बधाई

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  2. बहुत सुंदर ग़ज़ल प्रस्तुति!!

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  3. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ज्योति खरे जी

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  4. सुन्दर प्रस्तुति बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको

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  5. बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति,आपका आभार.

    ReplyDelete
  6. बेहतरीन रचना... बहुत बहुत बधाई !!
    मेरे ब्लॉग से जुड़े

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  7. bahtareen rachna................

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